करंट से मौत के बाद परिजनों ने किया प्रदर्शन, मुआवजे का किया मांग

बीआर दर्शन | बक्सर
जिले के थर्मल पावर प्लांट स्थित कोल डिपो के पास मंगलवार को करंट से दो किशोरों की दर्दनाक मौत के बाद गुरुवार को महादलित बस्ती के लोग सड़क पर उतर गए। ग्रामीणों ने सामाजिक कार्यकर्ता एवं बक्सर वारियर के रंजन राय के नेतृत्व में कोयला लोडिंग-अनलोडिंग का कार्य बंद करा दिया तथा प्लांट में कोयला ले जाने वाले मार्ग को जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।

प्रदर्शन की सूचना मिलते ही सीआईएसएफ के जवानों के साथ प्लांट प्रबंधन और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा प्रदर्शनकारियों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। हालांकि ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग करते रहे। 
बता दें कि मंगलवार को महादलित बस्ती के दो बच्चे कोल डिपो के समीप खेलते-खेलते पहुंच गए थे। बताया जा रहा है कि किसी के डांटने के बाद दोनों बच्चे पास की एक पुलिया में छिपने चले गए। इसी दौरान वहां पानी में पड़े कटे हुए बिजली के तार की चपेट में आ गए। करंट लगने से दोनों बच्चे पानी में गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने तत्काल उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। दोनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान महादलित बस्ती निवासी ढोंढा मुसहर के 10 वर्षीय पुत्र रोहित कुमार तथा दिमागी मुसहर के 12 वर्षीय पुत्र सुभाष कुमार के रूप में हुई है। मृत दोनों बच्चे बेहद गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते थे। उनके माता-पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। एक साथ दो बच्चों की असामयिक मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

10-10 हजार देकर मामला दबाने का आरोप :
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के बाद संबंधित ठेकेदार द्वारा दोनों मृतक परिवारों को 10-10 हजार रुपये देकर मामले को शांत कराने की कोशिश की गई। उस समय परिजन गहरे सदमे में होने के कारण कुछ नहीं बोल सके, लेकिन जैसे-जैसे घटना की जानकारी लोगों तक पहुंची, गांव में नाराजगी बढ़ती गई। इसी आक्रोश के चलते गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कोल डिपो पहुंच गए और वहां चल रहे कार्यों को बंद करा दिया। प्रदर्शनकारियों ने कोयला परिवहन मार्ग जाम कर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और प्लांट प्रबंधन से मृतक दोनों बच्चों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये का मुआवजा और प्रत्येक पीड़ित परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी की मांग कर रहे थे।




