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अवैध रूप से हिरासत में रखने कोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख, थानेदार समेत दो से स्पष्टीकरण 

 

बीआर दर्शन | बक्सर

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अमित कुमार शर्मा की कोर्ट में पॉक्सो के एक मामले में सुनवाई हुई। कोर्ट ने ब्रह्मपुर को कर्त्तव्य में लापरवाह पाया।‌ कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दो आरोपियों को तत्काल रिहा करने का निर्देश देते हुए रिमांड आवेदन खारिज कर दिया और संबंधित पुलिस अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने आरोपी अलीम हाशमी और तबिस अली को 5,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले में लगाए गए आरोप ऐसे नहीं हैं, जिनमें सात वर्ष से अधिक की सजा हो, फिर भी गिरफ्तारी में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान आरोपियों ने कोर्ट को बताया कि वे 26 अप्रैल से ही थाने में रखे गए थे, जबकि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी 28 अप्रैल को दिखायी। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया अवैध हिरासत मानते हुए गंभीर चिंता जताई। अदालत ने यह भी पाया कि पीड़िता का बयान अब तक दर्ज नहीं किया गया है। शिकायत में बताए गए मोबाइल संदेशों के स्क्रीनशॉट प्रस्तुत नहीं किए गए। केस डायरी में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इन कारणों से अदालत ने रिमांड को उचित नहीं माना। अदालत ने ब्रह्मपुर थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार और जांच पदाधिकारी विनोद कुमार यादव से तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। उनसे पूछा गया है कि उच्चतम न्यायालय के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में दिए गए निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया? गिरफ्तारी की सही तारीख क्यों छिपाई गई? अवैध हिरासत के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए?

दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि विभागीय जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सके। 14 मई 2026 को अगली सुनवाई तय की गई है।

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