नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के दो दोषियों को आजीवन कारावास

बीआर दर्शन | बक्सर
नाबालिग लड़की को अगवा कर बंधक बनाने, जबरन नाच-गाने का दबाव डालने और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले बुधवार को अदालत में सुनवाई हुई। व्यवहार न्यायालय स्थित विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दो मुख्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और उपचार के लिए 18 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।

कोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक मामला वर्ष 2013 का है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली एक नाबालिग अपने खेत में सोहनी कर रही थी। उसी दौरान वह अचानक अचेत हो गई। होश आने पर उसने खुद को बक्सर जिले के नावानगर थाना क्षेत्र स्थित सोनवर्षा नट टोली के एक पक्के मकान में पाया।

घर में मौजूद मुन्ना नट और उसके भाई गणेश नट ने उसे बंधक बना लिया। दोनों उस पर आर्केस्ट्रा में नाचने और गाने का दबाव बनाने लगे। मना करने पर उसके साथ मारपीट की गई और दोनों ने लगातार दुष्कर्म किया। पीड़िता ने जब भागने की कोशिश की, तो मुन्ना नट ने गर्म लोहे के चाकू से उसके हाथ को छह जगह दाग दिया। लगभग दो महीने की प्रताड़ना के बाद 28 सितंबर 2013 की सुबह घर में किसी के न होने पर पीड़िता जान बचाकर भागी। वह सोनवर्षा बाजार पहुंची और स्थानीय लोगों को अपनी आपबीती सुनाई। ग्रामीणों की सूचना पर सोनवर्षा ओपी पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता का बयान दर्ज कर प्राथमिकी दर्ज की।


अभियोजन पक्ष ने कुल 15 गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मुन्ना नट और गणेश नट उर्फ जटहा नट को विभिन्न धाराओं में दोषी पाया। अदालत ने दोनों को शेष स्वाभाविक जीवनकाल तक के लिए सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अर्थदंड भी लगाया। मामले के तीसरे अभियुक्त 76 वर्षीय जगत नट को धारा 368 में दोषी पाते हुए जेल में बिताई गई अवधि की सजा देकर एक हजार रुपये के जुर्माने पर रिहा करने का आदेश दिया। एक अन्य महिला अभियुक्त की मुकदमे के दौरान ही मौत हो चुकी है, जबकि एक आरोपित को नाबालिग बताया गया था।

अदालत ने बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना और पॉक्सो नियमों के तहत पीड़िता को कुल 18 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसमें 15 लाख रुपये दुष्कर्म के लिए और 3 लाख रुपये गंभीर रूप से जलाए जाने के एवज में तय किए गए हैं। अदालत के आदेश के मुताबिक 15 लाख रुपये तीन साल के लिए सावधि जमा रहेंगे, जिसका मासिक ब्याज पीड़िता को मिलेगा, जबकि तीन लाख रुपये वह तत्काल निकाल सकेगी।




