CRIME

सेंट्रल जेल के विचाराधीन बंदी की मौत, हत्या का आरोप लगा परिजनों ने किया सड़क जाम

 

बीआर दर्शन | बक्सर 

केंद्रीय कारा में हाल ही में ले जाए गए एक बंदी की अचानक मौत हो गई। यह घटना सुबह तकरीबन 7:00 बजे हुई। जिसके बाद सेंट्रल जेल के कर्मियों के द्वारा शव को सदर अस्पताल पहुंचा दिया गया। अस्पताल और पुलिस के द्वारा स्वजनों को सूचना दी गई। मौके पर जब परिजन पहुंचे तो उन्होंने बंदी के साथ मारपीट किए जाने और इस वजह से उसकी मौत होने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।

उनका कहना था कि अभी दो दिन पूर्व वही वह बंदी से मिलकर आए थे फिर अचानक से उसकी मौत कैसे हो गई? यदि मौत हो भी गई तो जेल प्रशासन द्वारा शव को सदर अस्पताल में लावारिस हालत में क्यों छोड़ दिया गया? करीब 2 घंटे तक सदर अस्पताल में हंगामा होता रहा, जिसके बाद सदर एसडीपीओ गौरव पांडेय, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह तथा सदर अंचलाधिकारी पहुंचे और हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। एसडीपीओ का कहना है कि परिजनों के द्वारा एफआईआर दर्ज कराए जाने के मामले की जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मिली जानकारी के मुताबिक बक्सर नगर के जेल नगर पइन रोड निवासी केदार सिंह के 32 वर्षीय राजेंद्र प्रसाद को बीते 12 फरवरी को शराब बेचने के आरोप में पकड़ा गया था। जेल में उनकी तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल वार्ड में रखा गया था लेकिन शुक्रवार की सुबह अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई और उनकी मौत हो गई।

इस घटना की जानकारी मिलने के बाद सदर अस्पताल में पहुंचे मृतक के भाई राजू कुमार का यह आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई थी जिसके निशान उनके शरीर पर भी है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यह जेल प्रशासन और बक्सर पुलिस की मिलीभगत से की गई हत्या है जिसकी जांच होनी चाहिए।

मृतक की बहन रीना कुमारी का कहना है कि जानबूझकर उनके भाई को मारा गया है उन्हें पहले तो घर से रात में गिरफ्तार करके ले जाया गया और फिर उनके साथ मारपीट की गई जिस वजह से उनकी मौत हो गई है उन्होंने कहा कि उन्हें इंसाफ मिलना चाहिए।

ज्योति चौक पर शव रखकर किया प्रदर्शन :

जेल में मौत के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में लिपापोती का आरोप लगाते हुए परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने शव को ज्योति चौक पर रख जेल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी किया। परिजनों का कहना था कि दोषी जेल कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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