डीएसपी ने जांच में आरोपितों को दी क्लीन चिट, SC/ST आयोग के दखल के बाद खुली फाइल

बीआर दर्शन | बक्सर
एससी-एसटी थाना में दलित महिला से मारपीट और बदसलूकी के मामले में डुमरांव एसडीपीओ द्वारा आरोपितों को क्लीन चिट मिलने के बाद एससी-एसटी आयोग के दखल पर कोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने सभी आरोपितों को सम्मन भेजा है। कोर्ट द्वारा मामले में संज्ञान लेते ही आरोपितों में हड़कंप मच गया।

मीटर शिकायत लेकर पहुंची महिला के साथ कथित बदसलूकी :
अधिवक्ता संजय राय से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के ललन जी के डेरा निवासी धर्मशीला कुमारी अपने बिजली मीटर में गड़बड़ी की शिकायत लेकर ब्रह्मपुर बिजली कार्यालय पहुंची थीं। आरोप है कि शिकायत सुनने के बजाय वहां मौजूद जेई और उनके सहयोगियों ने महिला के साथ जातिसूचक गालियां दीं, धक्का-मुक्की की और मारपीट कर कार्यालय से भगा दिया। पीड़िता के अनुसार घटना में वह घायल हो गई थीं। पहले उनका इलाज ब्रह्मपुर पीएचसी में कराया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के बाद पीड़िता ने बक्सर एससी/एसटी थाना पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

बताया जाता है कि मामले की जांच डुमरांव के तत्कालीन डीएसपी और उनके रीडर द्वारा की गई थी, जिसमें आरोपियों को राहत देते हुए केस से मुक्त कर दिया गया था। लेकिन पीड़िता ने हार नहीं मानी और पटना स्थित एससी/एसटी आयोग का दरवाजा खटखटाया। महिला की शिकायत पर आयोग ने गंभीरता दिखाते हुए अपर पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजा। इसके बाद पूरे मामले की दोबारा समीक्षा हुई और अब विशेष एससी/एसटी कोर्ट, बक्सर ने आरोपियों के खिलाफ संज्ञान ले लिया है।

जिला एवं एडिशनल सेशन जज-1 सह विशेष एससी/एसटी कोर्ट, बक्सर ने एससी/एसटी थाना कांड संख्या 23/2023 में ब्रह्मपुर बिजली विभाग के जेई समेत कई पदाधिकारियों के खिलाफ संज्ञान लेते हुए कार्रवाई आगे बढ़ा दी है। कोर्ट द्वारा जिन लोगों के खिलाफ संज्ञान लिया गया है उनमें ब्रह्मपुर बिजली विभाग के जेई अमित राय, विभोर तिवारी, ऋतुराज प्रसाद, वर्मा यादव और बबलू पांडेय शामिल हैं।
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अवैध हथियार के साथ शराब पार्टी के आरोप में जेल जा चुके हैं जेई :
बिजली विभाग के चर्चित जेई अमित कुमार का नाम इससे पहले भी विवादों में आ चुका है। बीते माह ब्रह्मपुर पुलिस ने उन्हें अपने छह सहयोगियों के साथ कथित रूप से अवैध हथियार और शराब पार्टी करते हुए गिरफ्तार किया था। उस दौरान पुलिस ने करीब 1.15 लाख रुपये नकद भी बरामद किए थे। अब दलित महिला उत्पीड़न मामले में कोर्ट की कार्रवाई के बाद विभाग की कार्यशैली और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।




