चौसा में आर्सेनिक मुक्त स्वच्छ जल से लहलहाएगी ‘पोषण वाटिका’

बीआर दर्शन | बक्सर
ग्रामीणों को जहरीले आर्सेनिक के प्रभाव से बचाने और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चौसा प्रखंड में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की गई है। प्रखंड के पांच चयनित स्थलों पर ‘पोषण वाटिका’ की स्थापना की गई है, जहाँ सब्जियों की सिंचाई अब खतरनाक रसायनों व आर्सेनिक से पूरी तरह मुक्त, स्वच्छ जल से की जाएगी।

इनरेम फाउंडेशन के प्रोग्राम ऑफिसर प्रवीण कुमार सिंह ने इस परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि भूजल में आर्सेनिक की मौजूदगी जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। दूषित पानी से उगाई जाने वाली सब्जियों के जरिए यह धीमा जहर सीधे मानव शरीर में प्रवेश करता है। इसी खतरे को देखते हुए पोषण वाटिका में आर्सेनिक मुक्त शुद्ध जल से सिंचाई की व्यवस्था की गई है, ताकि शुद्ध और पौष्टिक उपज से लोगों की सेहत में सुधार हो सके।प्रवीण कुमार सिंह ने बताया कि इस अभियान को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए एनजीओ ‘रेडरी’ के सचिव वीरेंद्र कश्यप का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। संस्थाओं द्वारा क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों को आर्सेनिक के दुष्प्रभावों तथा स्वच्छ जल के महत्व के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है।

योजना के तहत बहादुरपुर स्थित पोषण वाटिका में स्थानीय किसान श्रीभगवान सिंह को साग, खीरा, नेनुआ, भिंडी सहित विभिन्न मौसमी हरी सब्जियों के उन्नत बीज उपलब्ध कराए गए। इसके साथ ही पोषण वाटिका में दीर्घकालिक पोषण को बढ़ावा देने के लिए अमरूद, आंवला, नींबू और पपीता जैसे औषधीय व फलदार पौधे भी रोपे जाने हेतु दिए गए।


इस पहल से न केवल किसानों को घर-आंगन में ताजी और विषमुक्त सब्जियां मिलेंगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में पोषण स्तर सुधरने के साथ-साथ जल-जनित बीमारियों पर भी प्रभावी लगाम लगेगी।





