ट्रेड यूनियन के आह्वान पर आशा कार्यकर्ताओं ने किया रोषपूर्ण प्रदर्शन

बीआर दर्शन | बक्सर
ट्रेड यूनियन के बक्सर जिला के आशा और आशा फैसिलिटेटर एक दिवसीय हड़ताल में शामिल होकर सिविल सर्जन के समक्ष आक्रोषपूर्ण प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन का नेतृत्व आशा एवं आशा फैसिलिटेटर संघ के राज्य उपाध्यक्ष सह जिला संयोजक अरुण कुमार ओझा चिकित्सा संघ के राज्य उपाध्यक्ष मनोज चौधरी, महावीर पंडित, मीरा कुमारी एवं डैजी देवी ने किया। प्रदर्शन के बाद एक सभा हुई जिसकी अध्यक्षता मीरा कुमारी एवं डेजी देवी ने किया तथा संचालन अरुण कुमार ओझा ने किया।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं में कहा कि आशा एवं आशा फैसिलिटेटर अपने बैनर तले यह संज्ञान में बात लाना चाहते है कि विगत 6 माह से आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद है। राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा आवंटित 57 कार्यों के अलावा अन्य कार्य जैसे शराबबंदी, गृह कलह रोकना, किसानों का निबंध, आयुष्मान कार्ड बनाना जैसे अन्य कई काम आशा कार्यकर्ताओं से लिया जा रहा है। इस बात से राज्य सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन माननीय उच्च न्यायालय सभी सहमत हैं कि आशा स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है। इसके बावजूद विगत 6 माह से प्रोत्साहन राशि का भुगतान लंबित रखना घोर मानव एवं मजदूर विरोधी कार्य है। यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बाध्य होकर दिनांक 23 फरवरी 26 को माननीय मुख्यमंत्री एवं माननीय स्वास्थ्य मंत्री बिहार सरकार के समक्ष राज्य स्तरीय प्रदर्शन करना आयोजित किया जाएगा। इस प्रदर्शन धरना में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की जा सकती है।

मांगो में प्रमुख है चार लेबर कोड को रद्द करते हुए आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को श्रम नियमों के अधीन लाया जाए। आशा कार्यकर्ताओं को 6 माह से बताएं प्रोत्साहन राशि का एक भुगतान किया जाए। आशा एवं आशा फैसिलिटेटर के सेवानिवृत्ति की उम्र आंगनबाड़ी सेविका सहायिका की तरह 65 वर्ष किया जाए। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित ₹2000 बढ़े हुए प्रोत्साहित राशि को एकमुश्त राशि सीधे खाते में किया जाए। आशा एवं आशा फैसिलिटेटर को तृतीय वर्ग के कर्मचारी घोषित किया जाए। इसके साथ ही 13 सूत्री मांग पत्र गुरुवार कार्यपालक निदेशक बिहार पटना को संबंधित सिविल सर्जन बक्सर के माध्यम से समर्पित किया गया।

शिष्टमंडल मे अरुण कुमार ओझा, मनोज चौधरी, महावीर पंडित, डेजी कुमारी, मंजू कुमारी, मीरा कुमारी, दुर्गावती देवी आदि शामिल रही। अंत में गगन भेदी नारों के साथ अपनी मांगों की पूर्ति हेतु नारेबाजी की गई एवं सभा की कार्रवाई समाप्त की गई। 23 फरवरी को पटना में मार्च का आह्वान किया गया।



